मोती — Moon का रत्न
मोती चंद्र देव का रत्न है। गरुड़ पुराण के अनुसार मोती आठ स्रोतों से उत्पन्न होता है जिसमें सीप, हाथी और बादल शामिल हैं। चंद्रमा मन, भावना और माता का कारक है।
मुख्य तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| ग्रह | Moon |
| उंगली | कनिष्ठा |
| धातु | चाँदी |
| धारण दिवस | सोमवार |
| न्यूनतम वजन | 5–7 रत्ती |
मोती के लाभ
भावनात्मक संतुलन, अंतर्ज्ञान, मानसिक शांति और मातृशक्ति को बढ़ाता है।
कर्क, वृष और मीन लग्न के जातकों के लिए मोती सर्वाधिक लाभकारी है। कमजोर या पीड़ित चंद्रमा वाले जातक भी इसे धारण कर सकते हैं।
कौन धारण करे
कर्क, वृष और मीन लग्न के जातकों के लिए मोती सर्वाधिक लाभकारी है। कमजोर या पीड़ित चंद्रमा वाले जातक भी इसे धारण कर सकते हैं।
किसे नहीं पहनना चाहिए
मिथुन और कन्या लग्न वाले सावधानी से ज्योतिषी परामर्श के बाद ही धारण करें।
कैसे धारण करें
- दिन और समय: सोमवार को सूर्योदय के 1 घंटे के भीतर धारण करें।
- धातु: चाँदी में जड़वाएं।
- उंगली: दाहिने हाथ की कनिष्ठा।
- वजन: ज्योतिषीय प्रभाव के लिए न्यूनतम 5–7 रत्ती।
- सक्रियण: पहनने से पहले रात भर कच्चे दूध, शहद और गंगाजल में रखें। सुबह 108 बार मंत्र जपकर धारण करें।
मंत्र: Om Shraam Shreem Shraum Sah Chandraaya Namah
गुणवत्ता मार्गदर्शिका
बसरा (फारस की खाड़ी) का प्राकृतिक मोती सर्वश्रेष्ठ है। नकली प्लास्टिक या शंख-लेपित मोती से सदा बचें।
मोती के विकल्प
चंद्रकांत मणि (मूनस्टोन) मोती का सबसे प्रभावशाली और किफायती विकल्प है।
महत्वपूर्ण सूचना
- कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी योग्य वैदिक ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
- रत्न प्राकृतिक, अनुपचारित और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए।
- कृत्रिम या लैब-निर्मित रत्न में ग्रहीय ऊर्जा नहीं होती।
- पहनने से पहले रत्न को विधिवत सक्रिय (अभिमंत्रित) करें।
टिप्पणियाँ
🔮 इस लेख पर अपनी राय साझा करें — लॉगिन करें
लॉगिन करें →