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पितृ दोष कैलकुलेटर
सूर्य, 9वें भाव और राहु-केतु के आधार पर पितृ दोष की जाँच करें
जन्म विवरण दर्ज करें
सटीक जन्म समय और स्थान से सटीक पितृ दोष गणना होती है
🙏 पितृ दोष के उपाय
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पितृ तर्पण
पितृ पक्ष में प्रतिदिन पितरों को जल (तर्पण) अर्पित करें — विशेष रूप से महालय अमावस्या (सर्व पितृ अमावस्या) पर।
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श्राद्ध कर्म
प्रत्येक दिवंगत पूर्वज की पुण्यतिथि (तिथि) पर श्राद्ध कर्म करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और तिल, चावल व जल अर्पित करें।
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गया श्राद्ध
गया (बिहार) में पितृ कर्म करें — हिंदू शास्त्रों में इसे पितृ दोष का सबसे प्रभावी उपाय माना गया है।
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सूर्य अर्घ्य
प्रतिदिन उगते सूर्य को जल अर्पित करें। गायत्री मंत्र और आदित्य हृदयम् का पाठ करें — सूर्य पिता और पितरों का कारक है।
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पीपल वृक्ष पूजा
हर शनिवार पीपल के वृक्ष को जल दें, उसके नीचे तिल के तेल का दीपक जलाएँ और 7 बार परिक्रमा करें।
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पितृ गायत्री मंत्र
जाप करें: ॐ पितृभ्यो नमः (108 बार)। साथ ही: ॐ देवाय विद्महे, जीव पुत्राय धीमहि, तन्नो पितृ प्रचोदयात्।
🪔 पितृ दोष क्या है?
पितृ दोष पूर्वजों से संबंधित अधूरे कर्म या उनकी उपेक्षा के कारण बनता है। ज्योतिष में यह मुख्यतः सूर्य-राहु या सूर्य-केतु की युति से, 9वें भाव में राहु/केतु की उपस्थिति से, या 9वें भाव के स्वामी की पीड़ा से देखा जाता है। गुरु की दृष्टि दोष को कम करती है। सही उपाय से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में बाधाएं कम होती हैं।