गोमेद — Rahu का रत्न
गोमेद राहु का रत्न है जो उत्तर चंद्र नोड और छाया ग्रह है। पुराणों में राहु को असुर स्वर्भानु का कटा हुआ सिर बताया गया है जिसने समुद्र मंथन के समय अमृत पिया था। राहु भ्रम, प्रौद्योगिकी, विदेश और अपरंपरागत सफलता का कारक है।
मुख्य तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| ग्रह | Rahu |
| उंगली | मध्यमा |
| धातु | चाँदी या पंचधातु |
| धारण दिवस | शनिवार |
| न्यूनतम वजन | 6–9 रत्ती |
गोमेद के लाभ
राहु की अनिश्चितता शांत करता है, महत्वाकांक्षा को दिशा देता है।
मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ लग्न वाले गोमेद से अधिक लाभ उठाते हैं। राहु महादशा (18 वर्ष) में यह विशेष रूप से प्रभावशाली है।
कौन धारण करे
मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ लग्न वाले गोमेद से अधिक लाभ उठाते हैं। राहु महादशा (18 वर्ष) में यह विशेष रूप से प्रभावशाली है।
किसे नहीं पहनना चाहिए
कर्क, सिंह और मीन लग्न वाले बिना अनुभवी ज्योतिषी परामर्श के गोमेद न पहनें।
कैसे धारण करें
- दिन और समय: शनिवार को सूर्योदय के 1 घंटे के भीतर धारण करें।
- धातु: चाँदी या पंचधातु में जड़वाएं।
- उंगली: दाहिने हाथ की मध्यमा।
- वजन: ज्योतिषीय प्रभाव के लिए न्यूनतम 6–9 रत्ती।
- सक्रियण: पहनने से पहले रात भर कच्चे दूध, शहद और गंगाजल में रखें। सुबह 108 बार मंत्र जपकर धारण करें।
मंत्र: Om Raam Rahave Namah
गुणवत्ता मार्गदर्शिका
सीलोन (श्रीलंका) का सुनहरे शहद रंग का गोमेद, बिना धुंधलेपन के, सर्वश्रेष्ठ है।
गोमेद के विकल्प
गोमेद का कोई व्यापक विकल्प नहीं है। कुछ ज्योतिषी भूरे जरकन को विकल्प मानते हैं।
महत्वपूर्ण सूचना
- कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी योग्य वैदिक ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
- रत्न प्राकृतिक, अनुपचारित और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए।
- कृत्रिम या लैब-निर्मित रत्न में ग्रहीय ऊर्जा नहीं होती।
- पहनने से पहले रत्न को विधिवत सक्रिय (अभिमंत्रित) करें।
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