🌟 पुष्य नक्षत्र 2025

चंद्रमा लगभग हर 27 दिन में पुष्य नक्षत्र से गुज़रता है — साल के हर पुष्य नक्षत्र का आरंभ और समाप्ति का समय, और उसमें बनने वाले गुरु पुष्य / रवि पुष्य योग।

2025 2026 →
पुष्य नक्षत्र: आरंभ → समाप्ति (IST) गुरु / रवि पुष्य (नई दिल्ली)
मंगलवार, 14 जनवरी · 10:17
→ बुधवार, 15 जनवरी · 10:28
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सोमवार, 10 फरवरी · 18:00
→ मंगलवार, 11 फरवरी · 18:34
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रविवार, 9 मार्च · 23:55
→ मंगलवार, 11 मार्च · 00:51
🌟 रवि पुष्य · रविवार, 9 मार्च
9 मार्च 23:55 – 10 मार्च 06:36
रविवार, 6 अप्रैल · 05:32
→ सोमवार, 7 अप्रैल · 06:24
🌟 रवि पुष्य · रविवार, 6 अप्रैल
6 अप्रैल 06:05 – 7 अप्रैल 06:04
शनिवार, 3 मई · 12:34
→ रविवार, 4 मई · 12:53
🌟 रवि पुष्य · रविवार, 4 मई
4 मई 05:37 – 12:53
शुक्रवार, 30 मई · 21:29
→ शनिवार, 31 मई · 21:07
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शुक्रवार, 27 जून · 07:22
→ शनिवार, 28 जून · 06:35
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गुरुवार, 24 जुलाई · 16:43
→ शुक्रवार, 25 जुलाई · 16:00
🌟 गुरु पुष्य · गुरुवार, 24 जुलाई
24 जुलाई 16:43 – 25 जुलाई 05:38
गुरुवार, 21 अगस्त · 00:27
→ शुक्रवार, 22 अगस्त · 00:08
🌟 गुरु पुष्य · गुरुवार, 21 अगस्त
21 अगस्त 05:53 – 22 अगस्त 00:08
बुधवार, 17 सितंबर · 06:26
→ गुरुवार, 18 सितंबर · 06:32
🌟 गुरु पुष्य · गुरुवार, 18 सितंबर
18 सितंबर 06:07 – 06:32
मंगलवार, 14 अक्टूबर · 11:54
→ बुधवार, 15 अक्टूबर · 12:00
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सोमवार, 10 नवंबर · 18:48
→ मंगलवार, 11 नवंबर · 18:18
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सोमवार, 8 दिसंबर · 04:11
→ मंगलवार, 9 दिसंबर · 02:52
🌟 रवि पुष्य · रविवार, 7 दिसंबर
8 दिसंबर 04:11 – 07:01

नक्षत्र का समय भारतीय मानक समय (IST) में है और पूरे भारत के लिए एक ही है। गुरु / रवि पुष्य योग का वार नई दिल्ली के सूर्योदय से गिना गया है, इसलिए दूसरे शहरों में उसका आरंभ या अंत कुछ मिनट अलग हो सकता है। अलग-अलग पंचांगों में अयनांश की गणना के अंतर से समय एक-दो मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

ℹ️ पुष्य नक्षत्र और गुरु / रवि पुष्य योग कैसे निकाला जाता है?

पुष्य 27 नक्षत्रों में आठवाँ है, कर्क राशि में निरयन 93°20′ से 106°40′ तक; इसके स्वामी शनि और देवता बृहस्पति हैं। जब निरयन (लाहिड़ी) चंद्रमा इस भाग में प्रवेश करता है तब पुष्य नक्षत्र शुरू होता है और निकलने पर समाप्त होता है। समय स्विस एफ़ेमेरिस से निकाला गया है।

पुष्य नक्षत्र गुरुवार को हो तो गुरु पुष्य योग और रविवार को हो तो रवि पुष्य योग बनता है। वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि), इसलिए योग का समय = पुष्य नक्षत्र ∩ उस वार का सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का समय। परंपरा से इसे खरीदारी और नए कार्य शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है।

🌟 पुष्य नक्षत्र के बारे में → · 📅 आज का पंचांग → · 🪙 धनतेरस खरीदारी मुहूर्त → · 🌙 गंड मूल →

❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गुरु पुष्य और रवि पुष्य योग 2025 कब-कब है?

2025 में (नई दिल्ली): रवि पुष्य योग 9 मार्च (9 मार्च 23:55 – 10 मार्च 06:36); रवि पुष्य योग 6 अप्रैल (6 अप्रैल 06:05 – 7 अप्रैल 06:04); रवि पुष्य योग 4 मई (4 मई 05:37 – 12:53); गुरु पुष्य योग 24 जुलाई (24 जुलाई 16:43 – 25 जुलाई 05:38); गुरु पुष्य योग 21 अगस्त (21 अगस्त 05:53 – 22 अगस्त 00:08); गुरु पुष्य योग 18 सितंबर (18 सितंबर 06:07 – 06:32); रवि पुष्य योग 7 दिसंबर (8 दिसंबर 04:11 – 07:01)। हर योग का समय ऊपर की तालिका में है।

गुरु पुष्य योग और रवि पुष्य योग क्या है?

जब चंद्रमा पुष्य नक्षत्र (निरयन 93°20′–106°40′, कर्क राशि) में हो और वार गुरुवार हो तो गुरु पुष्य योग, रविवार हो तो रवि पुष्य योग बनता है। वार सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक गिना जाता है (मुहूर्त चिंतामणि)। परंपरा से इसे खरीदारी और नए कार्य शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है।