📅 वैदिक पंचांग — निःशुल्क

आज का पंचांग
किसी भी शहर के लिए

तिथि · नक्षत्र · योग · करण · वार · सूर्योदय · अभिजित मुहूर्त

📍 दिल्ली शहर / तारीख बदलें ▾
📍 यह दिल्ली का आज का पंचांग है। अपने शहर का पंचांग देखने के लिए ऊपर शहर चुनें — सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त शहर के अनुसार बदलते हैं।
📅 16 अक्टूबर 2026 · शुक्रवार · दिल्ली

आज एक नज़र में

शुक्ल षष्ठी · ज्येष्ठा नक्षत्र · आश्विन मास · संवत 2083
🌅 06:22   🌇 17:50   🌙 11:34
✅ आज का योग शोभन शुभ है — नए कार्य प्रारंभ करने के लिए अनुकूल दिन।
📆
वार
शुक्रवार
शुक्र वार
🌙
तिथि
षष्ठी
शुक्ल पक्ष
05:54 (अगले दिन) तक, फिर सप्तमी
⭐
नक्षत्र
ज्येष्ठा
पाद 4 · बुध
06:47 तक, फिर मूल
🔮
योग
शोभन
शुभ
22:05 तक, फिर अतिगण्ड
🌗
करण
कौलव
अर्ध-तिथि
16:38 तक, फिर तैतिल

✅ शुभ समय

✨ अभिजित मुहूर्त11:42 – 12:30
ⓘ जानकारी
दिन का सबसे शुभ समय — नए कार्य, यात्रा और महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए उत्तम
🌅 ब्रह्म मुहूर्त04:46 – 05:34
ⓘ जानकारी
सूर्योदय से पहले का पवित्र समय — ध्यान, अध्ययन और मंत्र जप के लिए सर्वोत्तम
🏆 विजय मुहूर्त14:01 – 14:47
ⓘ जानकारी
दिन के 15 मुहूर्तों में 11वाँ — विजय और सफलता की कामना वाले कार्यों के लिए शुभ माना जाता है
🌌 निशीथ काल23:41 – 00:31 (अगले दिन)
ⓘ जानकारी
रात के 15 मुहूर्तों में 8वाँ (मध्यरात्रि का मुहूर्त) — जन्माष्टमी, शिवरात्रि आदि की निशीथ पूजा का समय

🚫 अशुभ समय

🚫 राहु काल10:40 – 12:06
यमगण्ड14:58 – 16:24
गुलिक काल07:48 – 09:14
ⓘ जानकारी
सूर्योदय से सूर्यास्त को 8 बराबर भागों में बाँटकर, वार के अनुसार। शुभ कार्य शुरू करने से बचें। राहु काल के बारे में और जानें →
⛔ दुर्मुहूर्त08:39 – 09:25
12:29 – 13:15
ⓘ जानकारी
अशुभ समय — शुभ कार्य शुरू करने से बचें। दिन (सूर्योदय→सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त→अगला सूर्योदय) को 15-15 बराबर मुहूर्तों में बाँटकर, वार के अनुसार उत्तर भारतीय पंचांग परंपरा से।
⚠️ भद्रा (विष्टि करण) आज नहीं
ⓘ जानकारी
भद्रा सातवाँ चर करण (विष्टि) है — करण तिथि का आधा भाग होता है। परंपरा से भद्रा में शुभ कार्य शुरू नहीं किए जाते। समय भद्रा के पूरे काल का है, जो सूर्योदय से पहले शुरू या अगले दिन खत्म हो सकता है। भद्रा वास (भद्रा कहाँ निवास करती है) चंद्र राशि से तय होता है: मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक → स्वर्ग; कन्या, तुला, धनु, मकर → पाताल; कर्क, सिंह, कुंभ, मीन → पृथ्वी (मुहूर्त चिंतामणि)।
🌙 पंचकआज नहीं
🌙 गण्ड मूलपूरे दिन (अगले सूर्योदय तक)
ⓘ जानकारी
पंचक: चंद्रमा कुंभ-मीन में (धनिष्ठा उत्तरार्ध से रेवती)। गण्ड मूल: चंद्रमा अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल या रेवती में — उत्तर भारतीय परंपरा में पूरा नक्षत्र गिना जाता है, कुछ परंपराएँ केवल संधि वाला चरण गिनती हैं। पंचक के बारे में और जानें →
🧭 दिशा शूलपश्चिम
ⓘ जानकारी
आज इस दिशा में यात्रा शुरू करने से बचें (वार के अनुसार, उत्तर भारतीय पंचांग परंपरा)।

🌞 सूर्य और चंद्रमा

☀️ सूर्य
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त17:50
दिनमान11 घं 28 मि
रात्रिमान12 घं 31 मि
राशिकन्या
सूर्य नक्षत्रचित्रा, पाद 2
पाद कब तक17 अक्टूबर 19:51, फिर चित्रा 3
ⓘ जानकारी
सूर्य एक नक्षत्र में लगभग 13 दिन रहता है (निरयण, लाहिड़ी); अलग-अलग पंचांगों में यह समय कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।
🌙 चंद्रमा
चंद्रोदय11:34
चंद्रास्त21:40
नक्षत्रज्येष्ठा
ज्येष्ठा पाद 406:47 तक
मूल पाद 113:31 तक
मूल पाद 220:16 तक
मूल पाद 303:01 (अगले दिन) तक
मूल पाद 4अगले सूर्योदय तक

🌙 चंद्र राशि, चंद्रबल व ताराबल

चंद्रमा वृश्चिक में06:47 तक
शुभ चंद्रबल: वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ राशि वालों के लिए। मेष राशि वालों के लिए चंद्राष्टम
चंद्रमा धनु मेंअगले सूर्योदय तक
शुभ चंद्रबल: मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुंभ, मीन राशि वालों के लिए। वृषभ राशि वालों के लिए चंद्राष्टम
ज्येष्ठा नक्षत्र06:47 तक
शुभ ताराबल इन जन्म नक्षत्रों के लिए: अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वाफाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
मूल नक्षत्रअगले सूर्योदय तक
शुभ ताराबल इन जन्म नक्षत्रों के लिए: भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
ⓘ जानकारी
चंद्रबल: अपनी जन्म राशि से आज की चंद्र राशि तक गिनें — 1, 3, 6, 7, 10, 11 शुभ; 8वाँ चंद्राष्टम (सबसे अशुभ)। ताराबल: जन्म नक्षत्र से आज के नक्षत्र तक गिनती की तारा — संपत, क्षेम, साधक, मित्र, परम मित्र शुभ (मुहूर्त चिंतामणि)। जन्म (पहली) तारा यहाँ नहीं गिनी गई, उसमें नए कार्य टाले जाते हैं।

🗓️ हिंदू कैलेंडर और आगामी व्रत

हिंदू मास, संवत और ऋतु

मास (पूर्णिमांत)आश्विन
मास (अमांत)आश्विन
विक्रम संवत2083
शक संवत1948
ऋतुशरद
अयनदक्षिणायन
ⓘ जानकारी
मास का नाम उस राशि से तय होता है जिसमें अमावस्या के समय सूर्य (निरयण, लाहिड़ी) होता है; जिस चंद्र मास में कोई संक्रांति न हो वह अधिक मास होता है। उत्तर भारत में पूर्णिमांत मास चलता है (कृष्ण पक्ष अगले मास में गिना जाता है), दक्षिण और पश्चिम भारत में अमांत। संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से बदलता है; ऋतु चंद्र मास से और अयन मकर/कर्क संक्रांति से।

आगामी व्रत, तिथि और पर्व

तुला संक्रांति 17 अक्टूबर, 19:51
शुक्ल एकादशी 21 अक्टूबर, 14:12 – 22 अक्टूबर, 14:48
शुक्ल प्रदोष (त्रयोदशी) 23 अक्टूबर, 14:36 – 24 अक्टूबर, 13:37
पूर्णिमा 25 अक्टूबर, 11:56 – 26 अक्टूबर, 09:41
संकष्टी चतुर्थी 29 अक्टूबर, 01:07 – 29 अक्टूबर, 22:10
पुष्य नक्षत्र 1 नवंबर, 05:39 – 2 नवंबर, 04:30
🌟 रवि पुष्य योग: 1 नवंबर, 06:32 – 2 नवंबर, 04:30 (दिल्ली)
मासिक शिवरात्रि 7 नवंबर, 10:48 – 8 नवंबर, 11:28
अमावस्या 8 नवंबर, 11:28 – 9 नवंबर, 12:32
वलयाकार सूर्य ग्रहण मध्य 6 फ़रवरी 2027, 21:29 · दिल्ली में नहीं दिखेगा
16 अक्टूबर से आगे — हर एक का अगला काल। तिथि और पुष्य नक्षत्र का आरंभ–समाप्ति समय (IST) पूरे भारत के लिए एक है; गुरु/रवि पुष्य योग (गुरुवार/रविवार, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, उसी दिन पुष्य नक्षत्र) दिल्ली के सूर्योदय से है; व्रत का दिन स्थानीय नियमों पर निर्भर करता है, इसलिए यहाँ केवल तिथि का समय है। पूरी सूची के लिए नाम पर क्लिक करें।

🌅 उदय लग्न तालिका

लग्नआरंभसमाप्ति
कन्या04:1706:33
तुला06:3308:52
वृश्चिक08:5211:11
धनु11:1113:15
मकर13:1514:57
कुंभ14:5716:25
मीन16:2517:50
मेष17:5019:25
वृषभ19:2521:20
मिथुन21:2023:35
कर्क23:3501:55 (अगले दिन)
सिंह01:55 (अगले दिन)04:13 (अगले दिन)
ⓘ जानकारी
पूर्वी क्षितिज पर उदय हो रही राशि (लग्न) और उसका समय, इस शहर के लिए (निरयण, लाहिड़ी — कुंडली जैसा ही लग्न)। तालिका सूर्योदय के समय उदित लग्न से शुरू होकर राशिचक्र का एक पूरा चक्र — लगभग अगले सूर्योदय तक — दिखाती है। मुहूर्त चुनने में शुभ लग्न देखा जाता है।

🪐 ग्रह स्थिति — वक्री ग्रह

🔄 शुक्र (तुला में)3 अक्टूबर 2026 से 14 नवंबर 2026 तक
🔄 शनि (मीन में)27 जुलाई 2026 से 11 दिसंबर 2026 तक
ⓘ जानकारी
सूर्योदय के समय पृथ्वी से देखने पर जो ग्रह राशिचक्र में उल्टी दिशा में चलते दिखते हैं (निरयण, लाहिड़ी)। तारीखें वक्री होने और फिर मार्गी होने की हैं। सूर्य-चंद्र कभी वक्री नहीं होते; राहु-केतु सदा वक्री चलते हैं।

🔥 अग्निवास, शिववास व चंद्र वास

अग्निवासआकाश 05:54 (अगले दिन) तक, फिर पाताल
शिववासनंदी (वृषभ) पर 05:54 (अगले दिन) तक, फिर भोजन में
चंद्र वासउत्तर 06:47 तक, फिर पूर्व
ⓘ जानकारी
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, उत्तर भारतीय पंचांग परंपरा से। अग्निवास: (तिथि + 1 + वार) ÷ 4 — शेष 0 या 3 पृथ्वी, 1 आकाश, 2 पाताल; परंपरा से हवन तब किया जाता है जब अग्नि पृथ्वी पर हो। शिववास: (2 × तिथि + 5) ÷ 7 — शेष 1 कैलाश, 2 गौरी, 3 नंदी, 4 सभा, 5 भोजन, 6 क्रीड़ा, 0 श्मशान; रुद्राभिषेक के लिए कैलाश, गौरी या नंदी पर शिववास देखा जाता है। (तिथि शुक्ल प्रतिपदा से 1–30, वार रविवार = 1।) चंद्र वास चंद्र राशि की दिशा है — मेष, सिंह, धनु पूर्व; वृषभ, कन्या, मकर दक्षिण; मिथुन, तुला, कुंभ पश्चिम; कर्क, वृश्चिक, मीन उत्तर — जिसे यात्रा से पहले देखा जाता है।

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