Chhath Puja Vidhi Sunrise Sunset Surya Worship | मंत्रज्योति 
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छठ पूजा विधि सूर्योदय सूर्यास्त सूर्य पूजन

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लेखक
आचार्य विश्वनाथ जोशी
परंपरागत वैदिक ज्योतिषी — मुहूर्त, होरा शास्त्र और पाराशरी ज्योतिष के विशेषज्ञ।
Chhath Puja Vidhi Sunrise Sunset Surya Worship

नदी के किनारे खड़े होकर भोर में सूर्य को पवित्र भजन गाते हुए हजारों लोगों की आवाज़ में शामिल होना—यही छठ है, बिहार का सबसे चमकीला त्योहार जहाँ भक्ति और ब्रह्मांड की लय एक साथ मिलती है। किसी भी अन्य हिंदू अनुष्ठान से अलग, छठ को चार दिन की कड़ी व्रत, जल से जुड़ी क्रियाओं और सूर्योदय-सूर्यास्त की पूजा की माँग होती है जो शरीर और आत्मा दोनों को शुद्ध करती है। अगर आप इस प्राचीन त्योहार की तैयारी कर रहे हैं या इसकी गहन विधि को समझना चाहते हैं, तो यह संपूर्ण गाइड आपको हर पवित्र कदम पर ले जाएगी।

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

  • बाँस की टोकरी (डाला) — बाँस से बुनी हुई, भेंटों को रखती है
  • गन्ने की डंडियाँ (गन्ना) — मिठास और समृद्धि का प्रतीक
  • ठेकुआ — परंपरागत गेहूँ के आटे की मीठी रोटी
  • गुड़ और तिल का मिश्रण — ताकत के लिए गुड़ और तिल के बीज
  • ताज़े फल (फल) — केला, नारियल, संतरा, पपीता
  • हल्दी का पाउडर (हल्दी) — शुद्धि के लिए
  • चंदन का पेस्ट (चंदन) — ठंडक और पवित्रता के लिए
  • अगरबत्ती (अगरबत्ती) — सुगंध और भेंट के लिए
  • तेल के दीये (दिया) — घी या तेल से भरे मिट्टी के दीये
  • गेहूँ का आटा (आटा) — अनुष्ठान और भेंट के लिए
  • तांबे का बर्तन (कलश) — दिव्य ऊर्जा का प्रतीक
  • सिंदूर (सिंदूर) — शुभ लाल पाउडर

चरण-दर-चरण पूजा विधि

  1. पहले दिन अपने आप को तैयार करें (नहाय-खाय) — एक धार्मिक स्नान करें, अपने घर को अच्छी तरह साफ करें और स्वच्छ कपड़े पहनें। यह आपकी चार दिन की आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत को चिह्नित करता है।

  2. सभी पूजा सामग्री एकत्रित करें — अपनी पूजा की चीजों को व्यवस्थित तरीके से रखें। फल ताज़े और सब्जियाँ पकी हुई हों, क्योंकि ये आपके ईमानदार इरादे को दर्शाती हैं।

  3. दूसरे दिन से व्रत शुरू होता है — खरना (दूसरे दिन), गुड़ और दूध के साथ मीठी चावल की खीर (खीर) बनाएँ, एक बार खाएँ, फिर सूर्यास्त से व्रत शुरू करें।

  4. अपने शरीर को शुद्ध करें — सूर्यास्त की पूजा से पहले हल्दी के पानी से नहा लें ताकि आप आध्यात्मिक रूप से सूर्य देव का स्वागत करने के लिए तैयार हो जाएँ।

  5. पूजा की जगह को सजाएँ — पूर्व या उत्तर की ओर सूर्य की ओर मुँह करके बैठें। अपनी डाला (बाँस की टोकरी) को भेंटों से भरकर एक ऊँचे मंच पर रखें। इस पवित्र स्थान के चारों ओर तेल के दीये रखें।

  6. सूर्यास्त में सूर्य को जल अर्पित करें — डूबते हुए सूर्य की ओर मुँह करके खड़े हों, अपनी हथेलियों में हल्दी, दूध और फूलों की पंखुड़ियों से मिला हुआ जल भरें। "ॐ सूर्याय नमः" का जाप करें और धीरे-धीरे भेंट डालते समय सूर्य से आँख संपर्क बनाए रखें। अपने क्षेत्र के सटीक सूर्यास्त का समय जानने के लिए अपने पंचांग का उपयोग करें।

  7. डाला की भेंटें प्रस्तुत करें — अपनी फल, गन्ने और मिठाई की टोकरी सूर्य की ओर उठाएँ। श्रद्धा से प्रणाम करें और स्वास्थ्य, समृद्धि और पारिवारिक कल्याण के लिए आभार के प्रार्थना करें।

  8. तेल के दीये जलाएँ — जैसे ही सूर्य डूबे, अपनी पूजा की जगह के चारों ओर दीये जलाएँ। ये लपटें आंतरिक प्रकाश और दिव्य चेतना को दर्शाती हैं।

  9. पूरी रात व्रत रखें — कोई भोजन या पानी न लें। कई भक्त पूरी रात जागते हैं और सूर्य की दिव्य शक्ति पर ध्यान करते हुए भजन गाते हैं।

  10. सूर्योदय से पहले जागें (चौथे और छठे दिन) — सूर्योदय से कम से कम एक घंटे पहले उठें। नहा लें, स्वच्छ कपड़े पहनें, और अपनी डाला के साथ पूर्व की ओर मुँह करके खड़े हों।

  11. सूर्योदय की पूजा करें — जैसे ही सूर्य निकले, जल, दूध और फूलों की पंखुड़ियाँ अर्पित करें और सूर्य मंत्र का जाप करें। जब सूर्य की रोशनी आपके चेहरे पर पड़े, तो आप सूर्य का आशीर्वाद सीधे प्राप्त करते हैं।

  12. अपने व्रत को सावधानी से तोड़ें — सूर्योदय की पूजा के बाद प्रसाद (पवित्र भोजन) और फल धीरे-धीरे खाएँ। अपना पूरा व्रत तभी खत्म करें जब आपने अंतिम दिन सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों में सूर्य को भेंट दे दी हो।

शुभ समय (शुभ मुहूर्त)

छठ नए चाँद के बाद छठे दिन (षष्ठी तिथि) को आता है, वसंत (चैत्र महीने) और शरद (कार्तिक महीने) दोनों में। शर

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