Chhath Puja Vidhi Sunrise Sunset Surya Worship | मंत्रज्योति 
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छठ पूजा विधि सूर्य पूजन और उदय अस्त

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लेखक
सुरेश अय्यर
दक्षिण भारतीय कुंडली पद्धति, अष्टकवर्ग और गोचर के विशेषज्ञ।
Chhath Puja Vidhi Sunrise Sunset Surya Worship

कल्पना करें कि आप नदी में खुले पैरों खड़े हैं, सुबह की रोशनी में, पानी गले तक है, आंखें बंद हैं सूर्य की ओर—यह है छठ, भारत की सबसे कठिन और खूबसूरत सूर्य पूजा। ज्यादातर पूजाओं के विपरीत जो घर के अंदर होती हैं, छठ के लिए आपको नदी के किनारे सूर्य के सटीक उदय और अस्त के समय खुद को उपस्थित करना होता है। चार दिन तक भक्त कड़ी मेहनत से व्रत रखते हैं और सूर्योदय और सूर्यास्त दोनों समय पर एक साथ पूजा करते हैं, सूर्य देव से सीधा और सच्चा संबंध बनाते हैं। अगर आप कभी सोचते हैं कि वैदिक ज्ञान कैसे असली जीवन में अपना रूप दिखाता है, तो छठ ही इसका जवाब है।

आपको चाहिए (पूजा सामग्री)

  • बाँस की टोकरी [चढ़ाई/Chadhai] — भेंट रखने के लिए
  • गन्ने की डंडियाँ [गन्ना/Ganna] — लंबी उम्र का प्रतीक
  • गेहूँ और जौ के अंकुर [जवारे/Jawaare] — नई बढ़वार का प्रतीक
  • ठेकुआ (गुड़ और गेहूँ का मीठा खीर) — हाथ से बना पारंपरिक भेंट
  • फल [फल/Phal] — केला, संतरा, सेब, नारियल
  • दूध और दही [दूध और दही/Doodh aur Dahi]
  • घी और तेल के दीये [दीप/Deep] — शाम की पूजा के लिए मिट्टी के दीये
  • अगरबत्ती [अगरबत्ती/Agarbatti]
  • हल्दी और सिंदूर [हल्दी और सिंदूर/Haldi aur Sindoor]
  • आम और नीम की पत्तियाँ [आम और नीम की पत्तियां/Aam aur Neem ki Pattiyaan]
  • गेहूँ का आटा [मैदा/Maida] — भेंट बनाने के लिए
  • साफ सूती कपड़ा [सुथन/Suthan] — पूजा की पवित्रता के लिए

पूजा विधि कदम दर कदम

  1. अपने मन को पहले शुद्ध करें — असली पूजा से चार दिन पहले (जिसे कार्तिक शुक्ल षष्ठी कहते हैं), सुबह नहाएँ और शुद्ध खान-पान रखें। सरल शाकाहारी खाना खाएँ—खिचड़ी और दही सबसे अच्छा है। आपका शरीर ही पहली पूजा की जगह बन जाता है।

  2. चढ़ाई तैयार करें — सूर्योदय से रात भर पहले, बाँस की टोकरी में गन्ने, गेहूँ के अंकुर, फल और ठेकुआ को पिरामिड के आकार में सजाएँ। यह आपकी दिखाई देने वाली भेंट बन जाती है, जो धरती की सम्पन्नता को सूर्य को लौटाती है।

  3. सूर्योदय से पहले नदी के किनारे पहुँचें — साफ-सुथरे, अधिमानतः पीले या केसरी कपड़े पहनें [पीले वस्त्र/Peele Vastra]। महिलाएँ आमतौर पर बिना ब्लाउज की साड़ी पहनती हैं, और पुरुष धोती पहनते हैं। शांति के साथ पानी में उतरें, पूर्व की ओर मुँह करके जहाँ सूर्य उगेगा। यह समय बेहद जरूरी है—अपने इलाके के पंचांग में सूर्योदय का सटीक समय देखें।

  4. अर्घ्य देना (भेंट) — अपनी मुड़ी हुई हथेलियों में पानी लें, जिसमें चावल, फूल और दूध मिलाएँ। जब सूर्य की पहली किरण पानी को छुए, तो कमर तक पानी में खड़े होकर यह पानी वापस सूर्य को अर्पित करें। साथ में यह मंत्र बोलें: "ॐ सूर्याय नमः" (सूर्य को नमस्कार)। अगर हो सके तो यह मंत्र 108 बार दोहराएँ।

  5. चढ़ाई अर्पित करें — टोकरी को अपने माथे के सामने रखें और गहरे पानी में जाएँ (अगर सुरक्षित हो)। चार बार झुकें—पहले उदते हुए सूर्य को, फिर छठी माता को (इस पूजा से जुड़ी देवी), फिर अपने पूर्वजों को, और आखिर में सभी जीवों को। यह इशारा अपने फायदे से परे है और आपको सबकी भलाई से जोड़ता है।

  6. मन में एक ही भाव रखें — पूरी पूजा के समय अपना ध्यान अपने संकल्प [संकल्प/Sankalp] पर रखें। चाहे वह सेहत हो, परिवार की खुशहाली हो, या आत्मिक विकास हो, आपका दृढ़ ध्यान पूजा की शक्ति को बढ़ाता है।

  7. घर लौटें और व्रत रखें — पूजा के बाद घर आएँ बिना कुछ खाए-पिए (इसे निर्जल व्रत कहते हैं)। पूरे दिन भक्ति के काम करें: धर्मग्रंथ पढ़ें, ध्यान लगाएँ, या दूसरों की मदद करें। आपकी शारीरिक भूख ही आध्यात्मिक भूख बन जाती है।

  8. शाम की पूजा की तैयारी करें — दोपहर को ही घर भर में दीये जला दें। अगर आप मुहूर्त कैलकुलेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो अपना इलाका डालें ताकि सूर्यास्त का सटीक समय मालूम हो जाए।

  9. शाम को अर्घ्य देना — सूर्यास्त के समय वही अर्घ्य देने की पूजा दोहराएँ, इस बार पश्चिम की ओर मुँह करके। वही मंत्र लागू होते हैं, लेकिन आपकी ऊर्जा बदल जाती है—सुबह देवता को पुकारा जाता है, शाम को धन्यवाद दिया जाता है। चढ़ाई फिर से अर्पित करें, जिससे दिन की समाप्ति दिखे।

  10. **प्रसाद बाँटें (देवता का आश

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