Baglamukhi Puja Vidhi Yellow Goddess Ritual | मंत्रज्योति 
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बगलामुखी पूजा विधि: पीली देवी का अनुष्ठान

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लेखक
सुरेश अय्यर
दक्षिण भारतीय कुंडली पद्धति, अष्टकवर्ग और गोचर के विशेषज्ञ।
Baglamukhi Puja Vidhi Yellow Goddess Ritual

कल्पना कीजिए कि आप कानूनी जंग, किसी की बुरी बातों या किसी शत्रु के कुचक्र का सामना कर रहे हैं—और हिंदू धर्म की सबसे शक्तिशाली किंतु कम ज्ञात देवियों में से एक के माध्यम से दिव्य सुरक्षा पा रहे हैं। बगलामुखी, पीली देवी, शत्रुओं पर जीत दिलाती हैं, दुश्मनों को मौन करती हैं, और आध्यात्मिक शक्ति का अमूल्य वरदान देती हैं। यह कदम-दर-कदम मार्गदर्शिका आपको उनकी पवित्र पूजा को सच्चाई और भक्ति के साथ करने में मदद करेगी।

पूजा के लिए जरूरी सामग्री (पूजा समग्री)

  • पीले फूल (गुलदाउदी, गेंदा या गुलाब) [पुष्प]
  • वेदी को ढकने के लिए पीला कपड़ा या रेशमी दुपट्टा [पीठ पत्र]
  • बगलामुखी की पीतल या तांबे की मूर्ति या चित्र [मूर्ति]
  • अभिषेक के लिए पीला तिल का तेल [तिल तैल]
  • हल्दी पाउडर और पीला चंदन का पेस्ट [हल्दी और चंदन]
  • अगरबत्ती और कपूर [अगरबत्ती और कपूर]
  • घी का दीपक और कपास की बत्तियां [दीया]
  • पीले रंग की खीर या जौ [नैवेद्य]
  • घंटी या शंख [घंटा]
  • पीतल के बर्तन में पानी [कांस पात्र में जल]
  • लाल सिंदूर [सिंदूर]
  • चावल के दाने [चावल]

पूजा विधि: कदम-दर-कदम

कदम 1: पहले स्नान करके शुद्ध हो जाएं और साफ, अगर संभव हो तो पीले कपड़े पहनें। इससे आपकी आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है और देवी के प्रति सम्मान दिखता है।

कदम 2: अपने पूजा स्थान को उत्तर या पूर्व की ओर मुंह करके सजाएं। वेदी पर पीला कपड़ा बिछाएं और बगलामुखी की मूर्ति या चित्र को बीच में रखें। जगह शांत और बाधा-मुक्त हो।

कदम 3: देवी की मौजूदगी का आह्वान करने के लिए तीन बार घंटी बजाएं और आध्यात्मिक जगत को अपने सच्चे इरादे का संकेत दें।

कदम 4: देवी के पैरों में हल्के से पानी डालते हुए "ॐ बगलामुखी नमः" का जाप करें। यह प्रतीकात्मक शुद्धिकरण आपके और दिव्यता के बीच का द्वार खोलता है।

कदम 5: मूर्ति के माथे और शरीर पर हल्दी का पेस्ट और चंदन लगाएं, घड़ी की विपरीत दिशा में (दाएं से बाएं)—यह बगलामुखी पूजा का एक खास पहलू है जो नकारात्मक शक्तियों को उलटने की उनकी शक्ति को दर्शाता है।

कदम 6: मूर्ति पर पीला तिल का तेल लगाएं और धीरे से मलिश करें। साथ ही यह कल्पना करें कि सोने का प्रकाश देवी को घेरे हुए है और आपकी रक्षा कर रहा है।

कदम 7: एक-एक करके फूल अर्पित करें और बगलामुखी मंत्र का जाप करें: "ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां मुखं पदं स्तंभय जिह्वां किलवायं मुखं स्तंभय बुद्धि विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा।" अगर संभव हो तो इसे 108 बार दोहराएं, माला (प्रार्थना की मनकों की माला) से गिनती रखते हुए।

कदम 8: घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएं, धुएं को मूर्ति तक पहुंचने दें। यह आपके आसपास को शुद्ध करता है और आपकी प्रार्थनाएं ऊपर तक पहुंचाता है।

कदम 9: पीले रंग की खीर या जौ का प्रसाद अर्पित करें (नैवेद्य), अपने इरादों के बारे में मन ही मन में बोलें—चाहे शत्रुओं पर जीत, कानूनी मामलों में सुरक्षा, या आध्यात्मिक शक्ति।

कदम 10: वेदी के चारों ओर तीन बार दक्षिणावर्त (घड़ी की दिशा में) परिक्रमा करें, अपना ध्यान देवी और अपनी प्रार्थना पर केंद्रित रखते हुए।

कदम 11: मूर्ति के सामने पूरी तरह प्रणाम करें, अपना माथा जमीन से लगाएं—यह पूर्ण समर्पण और विनम्रता का प्रतीक है।

कदम 12: कृतज्ञता के साथ समाप्त करें, "जय बगलामुखी माता" (माता बगलामुखी को विजय हो) सात बार दोहराएं।

सर्वोत्तम समय (शुभ मुहूर्त)

बगलामुखी पूजा मंगलवार को सबसे शक्तिशाली होती है (मंगल ग्रह द्वारा शासित, जो जीत का ग्रह है), खासकर जब चंद्रमा कृत्तिका या उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र [चंद्र राशि] में हो। इस अनुष्ठान को शुक्ल पक्ष (बढ़ते चांद की अवधि) में करें ताकि सर्वोच्च प्रभाव हो। अपने समारोह के लिए सटीक शुभ समय पहचानने के लिए मुहूर्त कैलकुलेटर का उपयोग करें, जो आपके स्थान और वर्तमान ग्रह स्थिति को ध्यान में रखता है। इसके अलावा, पंचांग की जांच करने से आप आज के तिथि, नक्षत्र और योग के साथ संरेखित हो सकते हैं।

महत्व और लाभ

बगलामुखी—जिनका नाम संस्कृत में "सारस-मुखी" (बगुले जैसा चेहरा) है—आठवीं महाविद्या (ज्ञान देवी) हैं और नकारात्मक शक्तियों को लकवाग्

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