Annapurna Puja Vidhi Goddess of Food Nourishment | मंत्रज्योति 
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अन्नपूर्णा पूजा विधि - भोजन और पोषण की देवी

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लेखक
कविता मिश्रा
नक्षत्र, योग, दशा और उपायों पर लेखिका।
Annapurna Puja Vidhi Goddess of Food Nourishment

कल्पना करें एक ऐसी देवी की जिनका आशीर्वाद यह सुनिश्चित करे कि आपके घर में कोई भूखा न रहे—न सिर्फ शारीरिक रूप से, बल्कि आत्मिक और भावनात्मक रूप से भी पूरी तरह पोषित रहे। अन्नपूर्णा, प्रचुरता की देवी, इसी पवित्र वचन को प्रकट करती हैं। जब आप भक्ति के साथ अन्नपूर्णा पूजा करते हैं, तो आप उनकी असीम कृपा को अपनी रसोई, अपनी मेज और अपने परिवार के जीवन में आमंत्रित करते हैं।

आपको क्या चाहिए (पूजा सामग्री)

  • पीले फूल, विशेषकर गेंदा और तुलसी के पत्ते (पुष्प)
  • घी, चावल और एक कटोरी पका हुआ चावल (अन्न)
  • चीनी या गुड़ (गुड़)
  • तिल और हल्दी पाउडर (तिल और हल्दी)
  • अगरबत्ती और कपूर (अगरबत्ती और कपूर)
  • अन्नपूर्णा की तांबे या पीतल की मूर्ति या चित्र (मूर्ति)
  • घंटी और शंख (घंटी और शंख)
  • तेल और रुई की बत्ती वाला दीपक (दीया)
  • ताजे फल और सूखे मेवे भोग के रूप में (फल)
  • बेसन या चने का आटा वितरण के लिए (प्रसाद)
  • एक छोटे बर्तन में पानी (जल)
  • लाल कपड़ा या रेशम वेदी के लिए (वस्त्र)

चरण दर चरण पूजा विधि

  1. अपनी पवित्र जगह तैयार करें — पूजा की जगह को हल्दी मिले पानी से अच्छी तरह साफ करें। अपनी वेदी या मेज पर लाल कपड़ा बिछाएं ताकि देवी की दिव्य ऊर्जा उतर सके।

  2. गणेश जी का आह्वान करें — दीया जलाएं और घंटी को तीन बार बजाएं। "ॐ गं गणपतये नमः" कहते हुए भगवान गणेश का आह्वान करें, जो सभी बाधाओं को दूर करते हैं, और अपनी अन्नपूर्णा पूजा पर उनका आशीर्वाद माँगें।

  3. मूर्ति या चित्र रखें — अन्नपूर्णा की मूर्ति या चित्र को अपनी वेदी के बीच में रखें, अगर संभव हो तो पूर्व दिशा की ओर। इसके चारों ओर एक वृत्त बनाते हुए हल्दी और तिल बिखेरें।

  4. जल और फूलों का भोग लगाएं — अपने दाहिने हाथ से देवी को जल अर्पित करते हुए अपनी प्रार्थना मन ही मन में करें। उनके पैरों में पीले फूल रखें, जो पवित्रता और भक्ति का प्रतीक हैं। तुलसी के पत्तों को प्यार से रखें, सम्मान की निशानी के रूप में।

  5. अगरबत्ती और कपूर जलाएं — अगरबत्ती को जलाएं और देवी के सामने वृत्ताकार गति में तीन बार घुमाएं (आरती की तरह)। फिर सावधानी से धातु के बर्तन में कपूर को जलाएं और धीरे-धीरे लहराएं, पूरे स्थान को पवित्र सुगंध से भर दें।

  6. अन्नपूर्णा मंत्र का जाप करें — शक्तिशाली मंत्र "ॐ अन्नपूर्णये नमः" (भोजन की देवी को नमस्कार) का 108 बार या जितनी बार आप कर सकें, ईमानदारी से जाप करें। उस कंपन को महसूस करें जो आपके दिल को ब्रह्मांडीय प्रचुरता से जोड़ता है जिसका वह प्रतिनिधित्व करती हैं।

  7. चावल और पके भोजन का भोग लगाएं — घी, चीनी और तिल के साथ पका हुआ चावल एक छोटी प्लेट में उनके सामने प्रस्तुत करें। यह भोग (नैवेद्य) आपकी कृतज्ञता को दर्शाता है कि आपने कितना कुछ पाया है, और साथ ही आपकी इच्छा कि आप प्रचुरता को दूसरों के साथ बाँटें।

  8. भक्ति से घंटी बजाएं — अपने भोग के समय घंटी बजाएं, इसके कंपन से देवी की मौजूदगी की घोषणा करें। हर घंटी की आवाज़ आपके स्थान को पवित्र करती है और आपकी चेतना को ऊँचा उठाती है।

  9. आरती करें — देवी के सामने दीये को वृत्ताकार गति में लहराएं—पाँच बार घड़ी की दिशा में, जो पाँचों तत्वों का प्रतीक है। "जय अन्नपूर्णे, माता अन्नपूर्णे" (अन्नपूर्णा माता को जय) गाएं या गुनगुनाएं, पूरे दिल से।

  10. अपनी व्यक्तिगत प्रार्थना करें — सीधे अन्नपूर्णा से अपने परिवार की कुशलता, भोजन के लिए अपनी कृतज्ञता और दूसरों की सेवा करने की अपनी इच्छा के बारे में बात करें। उनसे प्रार्थना करें कि वह आपकी रसोई को पोषण और प्रेम का मंदिर बना दें।

  11. प्रसाद बाँटें — पूजा के बाद, चावल और बेसन की तैयारी को परिवार के सदस्यों, दोस्तों और अगर संभव हो तो ज़रूरतमंदों को दें। यह पवित्र भोजन अन्नपूर्णा के स्वास्थ्य और प्रचुरता का आशीर्वाद लेकर जाता है।

  12. शुभ समय चुनें — सबसे अच्छे परिणाम के लिए, आप मुहूर्त कैलकुलेटर का उपयोग करके अपनी पूजा के लिए सबसे शुभ समय ढूंढ सकते हैं, जो आपकी आध्यात्मिक साधना को ग्रहीय समर्थन सुनिश्चित करता है।

सबसे अच्छा समय (शुभ मुहूर्त)

अन्नपूर्णा पूजा शुक्रवार को करें, क्योंकि यह दिन शुक्र ग्रह के शासन में आता है, ज

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