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अक्षय तृतीया पूजा विधि संपूर्ण गाइड

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लेखक
पंडित रमेश शर्मा
वैदिक ज्योतिष विद्वान, 25 वर्षों का अनुभव। भविष्यवाणी और वैदिक उपायों में विशेषज्ञ।
Akshaya Tritiya Puja Vidhi Complete Guide

कल्पना कीजिए एक ऐसे दिन की जो इतना आशीर्वादित है कि इस दिन शुरू की गई कोई भी चीज कभी कम नहीं होती—आपका धन बढ़ता है, आपके काम फलते-फूलते हैं, और आपकी आध्यात्मिक प्रगति तेज होती है। यह है अक्षय तृतीया (अनंत तीसरा दिन), हिंदू कैलेंडर का सबसे शुभ दिन, जिसे पूरे भारत में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। चाहे आप कोई व्यापार शुरू कर रहे हों, सोना खरीद रहे हों, या अपनी आध्यात्मिक साधना को गहरा करना चाहते हों, यह दिन आपके इरादों को दिव्य कृपा से और भी शक्तिशाली बना देता है।

आपको क्या चाहिए (पूजा समग्री)

अक्षय तृतीया पूजा शुरू करने से पहले ये पवित्र सामग्री तैयार कर लें:

  • कलश (पवित्र तांबे या पीतल का बर्तन)
  • गंगाजल (गंगा का जल, या पवित्र जल की बूंद मिला हुआ शुद्ध पानी)
  • तुलसी की पत्तियां (पवित्र तुलसी)
  • फूल (लाल और पीले गुलदाउदी, गेंदे के फूल, या कमल)
  • अगरबत्ती और धूप (सुगंधित अगरबत्ती और धूप)
  • घी या तेल का दीपक (पवित्र दीपक)
  • चंदन का लेप (तिलक के लिए)
  • हल्दी और कुमकुम (हल्दी और सिंदूर)
  • बेसन या चावल का आटा (रंगोली के लिए)
  • फल और मिठाई (केला, आम, खिचड़ी, या हलवा प्रसाद के लिए)
  • तिल और गुड़ (तिल-गुड़, शुभता का प्रतीक)
  • पान के पत्ते और नारियल (प्रसाद के लिए)

चरण-दर-चरण पूजा विधि

इन पवित्र कदमों का पालन करके भक्ति के साथ अक्षय तृतीया पूजा करें:

  1. अपनी जगह को शुद्ध करें। सुबह जल्दी उठकर नहा लें और स्वच्छ कपड़े पहनें। पूजा की जगह को साफ करें और हल्दी मिले पानी का छिड़काव करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और देवी-देवताओं की उपस्थिति आती है।

  2. पवित्र रंगोली बनाएं। चावल के आटे, बेसन, या रंगीन पाउडर से अपनी पूजा की जगह के बीचों-बीच एक शुभ डिजाइन बनाएं। कमल की आकृति या सरल ज्यामितीय पैटर्न बनाएं जो ब्रह्मांडीय व्यवस्था को दर्शाते हों।

  3. कलश रखें। तांबे के बर्तन को रंगोली पर रखें और उसे आधे तक पानी से भरें। ऊपर नारियल रखें और चारों ओर तुलसी की पत्तियां लगाएं। कलश रचना और समृद्धि की कोख का प्रतीक है।

  4. गणेश जी का आह्वान करें। दीपक जलाएं और भगवान गणेश को फूल, अगरबत्ती और जल अर्पित करें। कम से कम 11 बार यह मंत्र बोलें: "ॐ गं गणपतये नमः" (बाधाओं को दूर करने वाले को नमस्कार)।

  5. माता लक्ष्मी का आह्वान करें। लक्ष्मी को फूल और चंदन का लेप अर्पित करें, जो समृद्धि की देवी हैं। यह उनका विशेष दिन है—वे सभी नए कामों को आशीर्वाद देती हैं। लक्ष्मी चालीसा पढ़ें या बस अपने घर में समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

  6. सूर्य देव को अर्पित करें। पूर्व की ओर मुंह करके सूर्य देव को जल अर्पित करें, जो शाश्वत ऊर्जा का प्रतीक हैं। "ॐ सूर्याय नमः" का जाप करके सभी जीवन के स्रोत को सम्मान दें।

  7. तिल-गुड़ का प्रसाद करें। परिवार के सदस्यों के साथ तिल और गुड़ का आदान-प्रदान करें और एक-दूसरे को आशीर्वाद दें। यह अनुष्ठान, जो अक्षय तृतीया के लिए अद्वितीय है, सामंजस्य को सुदृढ़ करता है और कड़वी बातों को रोकता है।

  8. अपना इरादा तय करें। एक सोने का सिक्का, गहना, या अपने नए कार्य का दस्तावेज़ पकड़ें। हाथ जोड़कर अपना खरा इरादा फुसफुसाएं—चाहे व्यापार शुरू करना हो, निवेश करना हो, विवाह हो, या आध्यात्मिक विकास हो। इस दिन ब्रह्मांड सुनता है।

  9. कई दीपक जलाएं। अपनी वेदी के चारों ओर पांच या सात दीपक रखें, जो पंच तत्वों और सात दिशाओं का प्रतीक हैं। उनकी रोशनी आपके जीवन के हर कोने में लक्ष्मी को आमंत्रित करती है।

  10. मंत्रों का जाप करें। महालक्ष्मी मंत्र "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" को 108 बार, या जितनी बार संभव हो, दोहराएं। हर दोहराव से आपके आशीर्वाद और शक्तिशाली होते हैं।

  11. प्रसाद बांटें। पूजा के बाद, आशीर्वादित खाना (मिठाई, फल, या खिचड़ी) अपने परिवार और पड़ोसियों को दें। इस दिन किसी को भी नकारें नहीं—दान-पुण्य आपके भाग्य को कई गुना बढ़ा देता है।

  12. आरती से समाप्त करें। दीपक को देवता के सामने, फिर अपने और अपने परिवार के सामने गोल घुमाएं। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और आशीर्वाद को स्थिर करता है।

सबसे अच्छा समय (शुभ मुहूर्त)

अक्षय तृतीया **शुक्ल पक्ष (

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