Varalakshmi Puja Vidhi South Indian Wealth Worship | मंत्रज्योति 
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वरलक्ष्मी पूजा विधि दक्षिण भारतीय धन पूजन

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लेखक
आचार्य विश्वनाथ जोशी
परंपरागत वैदिक ज्योतिषी — मुहूर्त, होरा शास्त्र और पाराशरी ज्योतिष के विशेषज्ञ।
Varalakshmi Puja Vidhi South Indian Wealth Worship

जब आपके घर में चमेली और हल्दी की खुशबू फैलती है और रेशम से सजे खंभे के सामने सोने के दीये जलते हैं, तो अदृश्य जगत में कुछ बदलाव होता है। वरलक्ष्मी पूजा—देवी लक्ष्मी (समृद्धि की देवी) की पूजा करने की पवित्र विधि—महज एक रस्मी क्रिया नहीं है। यह आपके घर में समृद्धि, सुरक्षा और ईश्वरीय आशीर्वाद का एक गहरा आमंत्रण है जो धन के साथ आपके रिश्ते को ही बदल देता है।

आपको जो चीजें चाहिए (पूजा समग्री)

  • गेंदे के फूल और चमेली की माला [पुष्प माला]
  • हल्दी का पाउडर और कुमकुम (सिंदूर) [मंजल और कुमकुम]
  • केला, नारियल और गन्ना [वाझपझम, तेंगा, करुम्बु]
  • सूती कपड़ा और रेशमी कपड़ा (पीले या लाल रंग का, अगर हो तो) [पट्टु]
  • लकड़ी या बांस की छड़ (4-5 फीट लंबी) [बांस की छड़]
  • बेसन (चने का आटा) और गुड़ [बेसन और गुड़]
  • कपूर और चंदन का पेस्ट [कपूर और चंदनम]
  • पाँच तरह के फल [पंच फलांगल]
  • तिल का तेल और गाय का घी [तिल तेल और घी]
  • घंटी, अगरबत्ती और तेल के दीये [घंटी, अगरबत्ती, दीप]
  • पान के पत्ते और सुपारी [पान पत्र]
  • कच्चा चावल, सफेद फूल और गन्ने के टुकड़े [अरिसी और गन्ने की पट्टियाँ]

पूजा विधि चरण दर चरण

  1. अपनी पूजा की जगह तैयार करें — अपने पूजा घर या घर के प्रवेश द्वार को अच्छी तरह साफ करें। हल्दी मिले हुए पानी को इस जगह के चारों ओर छिड़कें। इससे वह भौतिक और आध्यात्मिक जगह शुद्ध हो जाती है जहाँ लक्ष्मी का स्वागत किया जाएगा।

  2. पूजा की छड़ बनाएँ — बांस या लकड़ी की छड़ को मिट्टी के घड़े में सीधा खड़ा करें जिसे बालू, चावल या मिट्टी से भरा हो। यह छड़ (वरलक्ष्मी का प्रतीक) आपकी पूजा का मुख्य केंद्र बन जाती है। इसे सीधा और बीच में रखें।

  3. छड़ को सजाएँ — रेशमी कपड़े को नीचे से ऊपर तक छड़ के चारों ओर लपेटें। ऊपर की ओर कपड़े से शंकु का आकार बनाएँ। यह देवी की मौजूदगी को आपके घर में प्रकट करने का प्रतीक है।

  4. फूल और फल सजाएँ — छड़ के चारों ओर नियमित अंतराल पर ताजी गेंदे और चमेली के फूलों की माला पहनाएँ। सूती धागे से केला, नारियल और गन्ने के टुकड़े इसके चारों ओर बाँधें। पाँच फलों को अलग-अलग ऊँचाई पर बाँधें—ये प्रजनन शक्ति और समृद्धि का प्रतीक हैं।

  5. सुरक्षा की सीमा बनाएँ — चंदन के पेस्ट या हल्दी के पाउडर से छड़ के चारों ओर एक वृत्त बनाएँ। यह एक पवित्र जगह [पुण्य क्षेत्र] बनाता है जो नकारात्मक शक्तियों को दूर रखता है।

  6. दीये जलाएँ — छड़ के चारों ओर तेल के दीये (दीप) को चार या पाँच की संख्या में रखें। उन्हें घी या तिल के तेल से जलाएँ। जलती हुई लपट आपकी पूजा की जगह में ईश्वरीय चेतना को आमंत्रित करती है।

  7. घंटी बजाएँ और प्रार्थना करें — घंटी (घंटी) को तीन बार बजाएँ ताकि आपकी तैयारी की घोषणा हो। वरलक्ष्मी को विनम्र प्रणाम (नमस्कार) करें, जो सभी वांछित आशीर्वाद और धन देने वाली देवी हैं।

  8. कुमकुम और फूल लगाएँ — छड़ पर उस बिंदु पर कुमकुम का तिलक लगाएँ जहाँ देवी का माथा माना जाता है। फूल बिखेरें और "ॐ नमः श्रियै" या वरलक्ष्मी स्तोत्र का जाप करते हुए उन्हें छड़ के पैर में अर्पित करें।

  9. जल की पूजा करें — अपने परिवार के साथ छड़ के चारों ओर दक्षिणावर्त (प्रदक्षिणा) तीन या सात बार घूमें। घूमते हुए छड़ के पैर में तिल का तेल या पानी डालें। यह आपकी भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।

  10. पवित्र भोग अर्पित करें — बेसन की तैयारी, गुड़, नारियल के टुकड़े और गन्ने को छड़ के पैर में रखें। अपने व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और रिश्तों में समृद्धि के लिए प्रार्थना करते हुए उन्हें अर्पित करें।

  11. आरती से समाप्त करें — तेल का दीया छड़ के सामने गोलाकार गति में लहराएँ। परंपरागत आरती के गीत गाएँ या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें जबकि आपका परिवार जुड़े हुए हाथों से साथ दे।

  12. आशीर्वाद को बाँटें — छड़ को अर्पित किए गए भोग (प्रसाद) को सभी परिवार के सदस्यों के साथ साझा करें। इसे कृतज्ञता के साथ खाएँ। देवी के आशीर्वाद को अपने अंदर बहने दें।

सबसे अच्छा समय (शुभ मुहूर्त)

वरलक्ष्मी पूजा परंपरागत तौर पर तमिल महीने आदि (जुलाई-अगस्त) की पूर्णिमा से पहले शुक्रवार को की जाती है, लेकिन इसे किसी भी शुक

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