Tulsi Vivah Puja Vidhi for Dev Uthani Ekadashi | मंत्रज्योति 
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देव उठनी एकादशी पर तुलसी विवाह पूजा विधि

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लेखक
डॉ. प्रिया नायर
नक्षत्र और ग्रह प्रभाव की शोधकर्ता एवं लेखिका।
Tulsi Vivah Puja Vidhi for Dev Uthani Ekadashi

जब हर साल नवंबर में देव उठनी एकादशी आती है, तो लाखों हिंदू भक्त एक बहुत ही पवित्र और खुशी भरे अनुष्ठान को मनाते हैं - तुलसी विवाह। यह पवित्र तुलसी के पौधे का भगवान कृष्ण से प्रतीकात्मक विवाह है। यह सुंदर समारोह देवताओं की ब्रह्मांडीय नींद से जागरण के संकेत देता है और विवाह, नई शुरुआत, और आध्यात्मिक आशीर्वाद के लिए शुभ समय खोलता है। अगर आप जानना चाहते हैं कि इस पूजा को सच्ची भक्ति के साथ कैसे करें, तो यह गाइड आपको हर कदम पर साथ देगी।

आपको क्या चाहिए (पूजा सामग्री)

तुलसी का पौधा — पवित्र दुल्हन
कृष्ण की मूर्ति या फोटो — दिव्य दूल्हा
हल्दी का पाउडर — अनुष्ठान के लिए
कुमकुम — लाल विलायती अबीर (पवित्र लाल पाउडर)
चंदन का पेस्ट — शुभ निशान लगाने के लिए
ताजे फूल — गुलाब, जैस्मिन, गेंदे की पंखुड़ियां
घी और दीये — रोशनी और आशीर्वाद के लिए
अगरबत्ती — सुगंध के लिए
बेसन के लड्डू और मिठाई — भोग के रूप में
चावल और तिल — अनुष्ठान में छिड़कने के लिए
शंख — पवित्र विवाह की घोषणा के लिए
घंटी — देवी उपस्थिति बुलाने के लिए
कीमती धातुएं या गहने — तुलसी के लिए सजावट (वैकल्पिक)

चरण दर चरण पूजा विधि

  1. अपनी पवित्र जगह तैयार करें सुबह जल्दी तुलसी के पौधे को रखने वाली जगह को साफ करके। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुंह करें, जो वेदिक सिद्धांतों के अनुसार शुभ है।

  2. रंगोली बनाएं तुलसी के पौधे के चारों ओर रंगीन चावल, फूलों या रंगोली पाउडर से। ॐ, स्वास्तिक, और कमल जैसे पवित्र चिन्हों को शामिल करें, जो दिव्य ऊर्जा को आमंत्रित करते हैं।

  3. गणेश जी को आमंत्रित करें घंटी बजाकर और फूल और अगरबत्ती का भोग लगाकर। "ॐ गं गणपतये नमः" का जप करें ताकि आपके पूजा में बाधाएं दूर हों।

  4. तुलसी के पौधे को नहलाएं हल्दी और गुलाब की पंखुड़ियों वाले पानी से धीरे-धीरे। इससे पौधा पवित्र हो जाता है और दिव्य दुल्हन के रूप में तैयार होता है। इसे एक साफ कपड़े से सावधानी से सुखाएं।

  5. तुलसी के तने और पत्तियों पर हल्दी और कुमकुम लगाएं बिल्कुल जैसे दुल्हन को सजाया जाता है। तुलसी की महिमा के मंत्र का जप करें: "वृंदा देवी, लक्ष्मी देवी, कृष्ण प्रिय, नमोस्तुते" (हे तुलसी, हे लक्ष्मी, कृष्ण की प्रिय, आपको मेरा प्रणाम है)।

  6. तुलसी के पौधे को सजाएं ताजे फूलों की माला से। अगर उपलब्ध हो तो हरे और सोने के रंग के कपड़े से सजाएं। हर सजावट इस दिव्य पौधे के लिए आपके सम्मान और प्रेम को दर्शाती है।

  7. कृष्ण की मूर्ति को तुलसी के पास रखें। चंदन का पेस्ट लगाएं, फूलों से सजाएं, और अगरबत्ती और घी का दीया भोग लगाएं। यह दूल्हे का प्रतिनिधित्व करता है जो अपनी दिव्य दुल्हन की प्रतीक्षा कर रहा है।

  8. तुलसी विवाह को संपन्न करें तुलसी के पौधे को कृष्ण की मूर्ति के चारों ओर सात बार दक्षिणावर्त घुमाकर। तुलसी विवाह मंत्र का जप करें या संस्कृत श्लोकों का गायन करें जो इस मिलन का जश्न मनाते हैं।

  9. कृष्ण और तुलसी के दिव्य विवाह के लिए विशेष प्रार्थना और मंत्र करें। आप भगवद्गीता या कृष्ण भजन गा सकते हैं ताकि आध्यात्मिक वातावरण गहरा हो।

  10. शंख और घंटी को एक साथ बजाएं ताकि ब्रह्मांड को इस दिव्य विवाह की घोषणा हो। यह कंपन सामूहिक चेतना को ऊंचा उठाता है और आशीर्वाद आमंत्रित करता है।

  11. आशीर्वादित भोग का वितरण करें — प्रसाद को परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों को दें। इससे आपके पूजा की आध्यात्मिक शक्ति फैलती है।

  12. आने वाले साल भर तुलसी की दैनिक पूजा करने का वचन दें, क्योंकि अब यह इस पवित्र विवाह की दिव्य ऊर्जा को धारण करता है।

सही समय (शुभ मुहूर्त)

देव उठनी एकादशी हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने (अक्टूबर-नवंबर) में आती है। पंचांग देखकर सटीक तारीख जानें, क्योंकि यह पूर्णिमा के बाद ग्यारहवें दिन (एकादशी) को होती है।

सबसे शुभ समय सुबह जल्दी होता है, आदर्श रूप से सुबह 4 से 7 बजे के बीच। अगर आप अपने क्षेत्र और जन्मपत्री के लिए सटीक समय चाहते हैं, तो हमारे मुहूर्त कैलकुलेटर का उपयोग करें।

राहु काल (अशुभ ग्रहों का समय), यमकंटक (खतरे का समय),

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