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हनुमान जयंती पूजा विधि सुंदरकांड पाठ

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लेखक
राजेश पांडे
वास्तु शास्त्र और करियर ज्योतिष में 18 वर्षों का परामर्श अनुभव।
Hanuman Jayanti Puja Vidhi Sundarkand Path

कल्पना कीजिए उस पल की जब हनुमान की राम के प्रति अटूट भक्ति आपकी खुद की आध्यात्मिक साधना को बदल देती है—जब हनुमान जयंती के दौरान सुंदरकांड का पाठ केवल एक रीति-रिवाज न रह कर, दिव्य शक्ति और साहस के साथ सीधी बातचीत बन जाती है। यह प्राचीन वैदिक विधि, जिसे सदियों से किया जाता आया है, सुंदरकांड (रामायण का सुंदर अध्याय) के पाठ के जरिए हनुमान का आशीर्वाद प्राप्त करती है, और आपके घर और मन को सुरक्षा, निडरता और आध्यात्मिक दृढ़ता से भर देती है। अगर आपने कभी सोचा है कि इस पवित्र पूजा को सही तरीके से कैसे करें, तो यह गाइड आपको हर कदम पर स्पष्टता और श्रद्धा के साथ चलाएगी।

आपको जो चीजें चाहिए (पूजा सामग्री)

हनुमान जयंती पूजा और सुंदरकांड पाठ के लिए ये जरूरी चीजें इकट्ठा करें:

  • कलश (पवित्र तांबे या पीतल का बर्तन) जिसमें पानी भरा हो
  • गेंदा के फूल (गेंदा) और लाल फूल — हनुमान को प्रिय
  • सिंदूर (लाल रंग का पाउडर) — हनुमान की मूर्ति पर लगाने के लिए
  • घी (शुद्ध मक्खन) और गुड़
  • तिल (तिलकुट के दाने) और केले — परंपरागत भेंट
  • अगरबत्ती — शुधारस या चमेली की खुशबू वाली
  • दीया (तेल का दीपक) घी या रुई की बत्ती के साथ
  • सुंदरकांड का प्रिंटेड या हाथ से लिखा पाठ (पूरा पाठ)
  • हनुमान मूर्ति या तस्वीर — पूर्व की ओर मुख करके
  • लाल कपड़ा या लाल धागा (मोली) — पवित्र धागा
  • प्रसाद की सामग्री: दूध, चावल, बेसन का हलवा, या लड्डू
  • घंटी और शंख — शुभता के लिए

पूजा विधि कदम दर कदम

कदम 1: अपनी पूजा की जगह (पूजा मंडप) को साफ करके शुद्ध करें। जगह को झाड़ू लगाएं और तुलसी के पत्तों वाले पानी का छिड़काव करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पवित्र स्थान तैयार होता है।

कदम 2: हनुमान की मूर्ति या तस्वीर को ऊंचे स्थान पर पूर्व की ओर मुख करके रखें। मूर्ति को साफ कपड़े पर रखें—लाल या केसरी रंग का, जो हनुमान के लिए पवित्र है।

कदम 3: कलश में पानी भरें और उसे मूर्ति के पास रखें। बर्तन में फूल, तुलसी के पत्ते और आम की पत्तियां डालें, जो समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक हैं।

कदम 4: मूर्ति के सामने दीया जलाएं। यह दीप प्रकाश का और अंधकार—शारीरिक और आध्यात्मिक अज्ञान दोनों—को दूर करने का प्रतीक है।

कदम 5: घंटी बजाएं और शंख को तीन बार फूंकें। इससे देवताओं को अपने भक्तिमय इरादे की घोषणा होती है।

कदम 6: हनुमान के पैरों पर फूल चढ़ाएं और "ॐ हनुमते नमः" (हनुमान को प्रणाम) का पाठ करें। गेंदा और लाल फूल श्रद्धा से रखें, साहस और सुरक्षा के लिए अपना आशय रखते हुए।

कदम 7: मूर्ति के माथे और शरीर पर सिंदूर लगाएं, जो शक्ति और शुभता का प्रतीक है। यह दाहिने हाथ से, हथेली ऊपर की ओर करके किया जाता है।

कदम 8: आरामदायक पालथी मारकर बैठें (सुखासन या पद्मासन) और अगरबत्ती जलाएं। अब सुंदरकांड पाठ शुरू करें—पवित्र वाचन। पूरा पाठ धीमी और सचेत गति से करें, हर संस्कृत शब्द को स्पष्ट उच्चारण करते हुए। यदि पूरी सुंदरकांड (जो 2-3 घंटे लगती है) का पाठ कर रहे हैं, तो इसे हनुमान जयंती के दौरान कई दिनों में बांट सकते हैं।

कदम 9: मूर्ति के पैरों पर नैवेद्य (भोजन की भेंट) रखें: घी, गुड़, तिल, केले और बना हुआ प्रसाद। ये भेंटें समर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक हैं।

कदम 10: आरती करें (दीये की रोशनी की परिक्रमा) एक या कई बत्तियों वाले दीये से। इसे मूर्ति के सामने घड़ी की दिशा में चलाएं जबकि हनुमान चालीसा या भक्ति गीत गाएं।

कदम 11: परिवार और भक्तों को प्रसाद (पवित्र भोजन) दें। यह देने और दिव्य कृपा पाने के चक्र को पूरा करता है। आरती के लिए सही शुभ समय जानने के लिए मुहूर्त कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें।

कदम 12: मूर्ति को पूरे शरीर से प्रणाम करके पूरी करें और साहस, सुरक्षा और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्रार्थना करें। अपनी कलाई पर लाल धागा बांधें या इसे आशीर्वादित सुरक्षा के रूप में रखें।

सबसे अच्छा समय (शुभ मुहूर्त)

हनुमान जयंती चैत्र कृष्ण अमावस्या (मार्च-अप्रैल में नई चाँद की रात) को आती है। लेकिन क्षेत्रीय रीति-रिवाजों के अनुसार इसे अक्सर चैत्र शुक्ल पूर्णिमा (पूर्णचंद्र) को मनाया जाता है। अ

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