Guru Purnima Puja Vidhi Honouring the Guru | मंत्रज्योति 
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गुरु पूर्णिमा पूजा विधि गुरु को सम्मान देना

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लेखक
राजेश पांडे
वास्तु शास्त्र और करियर ज्योतिष में 18 वर्षों का परामर्श अनुभव।
Guru Purnima Puja Vidhi Honouring the Guru

क्या आपने कभी सोचा है कि एक शिक्षक आपके पूरे जीवन की दिशा को कैसे बदल सकता है? हिंदू परंपरा में गुरु—आपका आध्यात्मिक शिक्षक—को भगवान से भी ज्यादा पवित्र माना जाता है, क्योंकि गुरु आपको भगवान तक पहुंचने का रास्ता दिखाते हैं। गुरु पूर्णिमा, जो आषाढ़ महीने (जून–जुलाई) की पूर्णिमा को मनाई जाती है, अपने गुरु को सम्मान देने, धन्यवाद देने और उनका आशीर्वाद लेने का सबसे शुभ दिन है। यह प्राचीन रीति-रिवाज आपको हजारों सालों तक चली आने वाली ज्ञान की अटूट परंपरा से जोड़ता है।

आपको क्या चाहिए (पूजा सामग्री)

  • कलश (पवित्र तांबे या पीतल का बर्तन) जिसमें पानी भरा हो
  • गणेश मूर्ति (भगवान गणेश की मूर्ति) या तस्वीर
  • गुरु मूर्ति (अपने गुरु की मूर्ति या तस्वीर)
  • पुष्प (ताजे फूल—गेंदा, चमेली या गुलाब पसंद हैं)
  • धूप (अगरबत्ती या धूप की शंकु)
  • दीया (मिट्टी का दीपक घी और रुई की बत्ती के साथ)
  • अक्षत (हल्दी मिली हुई अखंड चावल)
  • नैवेद्य (पवित्र भोग—फल, मिठाई, खिचड़ी या बना हुआ प्रसाद)
  • पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनी का मिश्रण)
  • रुद्राक्ष माला (प्रार्थना की माला, आदर्श रूप से 108 मनके)
  • चंदन (चंदन का पेस्ट)
  • मंत्र कागज पर या छपे हुए (गुरु मंत्र और गायत्री मंत्र)

चरण-दर-चरण पूजा विधि

  1. अपनी पूजा की जगह तैयार करें – वेदी के क्षेत्र को पानी से अच्छी तरह साफ करें। एक साफ कपड़ा या चटाई बिछाएं जो पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करे। यह दिशा आपको दिव्य ऊर्जा के प्रवाह के साथ जोड़ती है। अपने जूते उतारें और अगर संभव हो तो औपचारिक स्नान करें, नहीं तो कम से कम अपने हाथ और चेहरे को धो लें।

  2. गणेश को आमंत्रित करें – गणेश की मूर्ति या तस्वीर को अपनी वेदी के उत्तरपूर्व कोने में रखें। गणेश को फूल और अक्षत (चावल) अर्पित करें। पांच बार "ॐ गं गणपतये नमः" का जाप करें ताकि आपकी पूजा में बाधाएं दूर हों।

  3. गुरु की तस्वीर लगाएं – अपने गुरु की मूर्ति या तस्वीर को वेदी के बीच में रखें, थोड़ा ऊंचे स्थान पर। अगर आपके पास तस्वीर नहीं है, तो अपने गुरु के रूप को गहरी श्रद्धा से मानसिक रूप से देखें। तस्वीर के दाईं ओर एक दीया (दीपक) जलाएं।

  4. कलश भरें – गुरु की तस्वीर के बाईं ओर कलश (पवित्र बर्तन) पानी का रखें। बर्तन के मुंह में आम या केले की पत्तियां डालें, और इसे अक्षत और फूलों से सजाएं। कलश दिव्य उपस्थिति और समृद्धि का प्रतीक है।

  5. पवित्र निशान लगाएं – अपनी तर्जनी को चंदन (चंदन का पेस्ट) में डुबोएं और अपने माथे पर तिलक लगाएं। यह आपकी तीसरी आंख को जागृत करता है और आपकी चेतना को केंद्रित करता है।

  6. प्राणायाम से शुरुआत करें – आरामदायक बैठने की स्थिति में बैठें। पांच गहरी सांसें लें: नाक से चार की गिनती तक सांस लें, चार की गिनती तक रोकें, फिर चार की गिनती तक छोड़ें। यह मन को शांत करता है और आपको ईमानदारी से पूजा करने के लिए तैयार करता है।

  7. गुरु मंत्र का जाप करें – अपनी आंखें बंद करें और सार्वभौमिक गुरु मंत्र को सच्चे भक्तिभाव से दोहराएं:
    "गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु, गुरु देवो महेश्वर, गुरु साक्षात परम ब्रह्मा, तस्मै श्री गुरवे नमः"
    इसे 11 बार या 27 बार अपनी रुद्राक्ष माला का उपयोग करके दोहराएं।

  8. फूल और धूप अर्पित करें – मंत्र के हर जाप के साथ गुरु के चरणों में एक फूल अर्पित करें। धूप (अगरबत्ती) जलाएं और इसे वेदी के चारों ओर दक्षिणावर्त दिशा में घुमाएं, एक सुगंधित भोग बनाएं जो शुद्धिकरण का प्रतीक है।

  9. नैवेद्य (भोग) प्रस्तुत करें – अपने गुरु की तस्वीर के सामने तैयार नैवेद्य (भोग) अर्पित करें। चाहे यह ताजे फल हों, मिठाई हो, या खिचड़ी जैसा बना हुआ व्यंजन हो, इसे इस समझ के साथ अर्पित करें कि आप अपने शिक्षक के भीतर दिव्य ज्ञान को पोषित कर रहे हैं।

  10. आरती करें – अगर आपके पास पंचामृत (पवित्र अमृत) है, तो दीये की लौ में कुछ बूंदें डालें जबकि आप इसे गुरु की तस्वीर के चारों ओर दक्षिणावर्त दिशा में तीन बार घुमाएं। इस पवित्र पल के दौरान निरंतर "ॐ" का जाप करें। आपकी आवाज आपकी कृतज्ञता को सीधे आपके शिक्षक की आत्मा तक पहुंच

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