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रोहिणी नक्षत्र — संपूर्ण वैदिक गाइड

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लेखक
पंडित रमेश शर्मा
वैदिक ज्योतिष विद्वान, 25 वर्षों का अनुभव। भविष्यवाणी और वैदिक उपायों में विशेषज्ञ।

परिचय

रोहिणी वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों में से चौथा नक्षत्र है, जो वृषभ राशि में 40°00′ से 53°20′ तक फैला हुआ है। चंद्रमा के स्वामित्व और ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) की अध्यक्षता वाले इस नक्षत्र में एक अनूठी ऊर्जा होती है जो व्यक्ति के व्यक्तित्व, करियर और आध्यात्मिक मार्ग को आकार देती है।

मुख्य विशेषताएं

स्वामी ग्रह: चंद्रमा
राशि चक्र: वृषभ (40°00′ – 53°20′ वृषभ)
देवता: ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता)
प्रतीक: बैलगाड़ी या रथ
गण: मनुष्य
प्रकृति: ध्रुव (स्थिर/स्थायी)
नाड़ी: आदि (वात)
शुभ रंग: सफेद
भाग्यशाली अंक: 4
शरीर का प्रभावित अंग: माथा और आँखें
पशु प्रतीक: नाग (कोबरा)

मुख्य गुण

आकर्षक · रचनात्मक · कामुक · पोषण करने वाला · कलात्मक

खूबियां

रोहिणी चंद्रमा का सबसे पसंदीदा नक्षत्र है और इसे सबसे शुभ नक्षत्रों में से एक माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्मे लोग स्वभाव से आकर्षक, रचनात्मक होते हैं और समृद्धि को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उनका सौंदर्य बोध काफी विकसित होता है और प्रकृति व सुंदरता से उनका गहरा जुड़ाव होता है।

चुनौतियां

ये लोग भौतिकवादी, अधिकार जताने वाले और अत्यधिक लगाव रखने वाले हो सकते हैं। इनमें भोग-विलास की आदत और जिद्दीपन भी देखा जा सकता है।

करियर के बेहतरीन विकल्प

  • कला और सौंदर्य
  • कृषि और बागवानी
  • फैशन और आभूषण
  • फिल्म और मीडिया
  • वास्तुकला (आर्किटेक्चर)

अनुकूल नक्षत्र

मृगशिरा, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा

वैदिक उपाय

भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करें। सोमवार के दिन शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं। मोती या मूनस्टोन धारण करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहिणी नक्षत्र क्या है?

रोहिणी वैदिक ज्योतिष में चौथा नक्षत्र है, जो वृषभ राशि में 40°00′ से 53°20′ तक फैला हुआ है। इस पर चंद्रमा का शासन है और इसके अधिष्ठाता देवता ब्रह्मा (सृष्टिकर्ता) हैं। इसका प्रतीक बैलगाड़ी या रथ है।

रोहिणी नक्षत्र के मुख्य लक्षण क्या हैं?

आकर्षक · रचनात्मक · कामुक · पोषण करने वाला · कलात्मक। रोहिणी चंद्रमा का पसंदीदा नक्षत्र है और इसे बेहद शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र के जातक स्वाभाविक रूप से आकर्षक, रचनात्मक होते हैं और प्रचुरता को आकर्षित करते हैं। उनका सौंदर्य बोध बेहतरीन होता है और वे प्रकृति व सुंदरता से गहरा जुड़ाव रखते हैं।

रोहिणी नक्षत्र के जातकों के लिए कौन से करियर अनुकूल हैं?

कला और सौंदर्य, कृषि और बागवानी, फैशन और आभूषण, फिल्म और मीडिया, वास्तुकला। ये क्षेत्र रोहिणी नक्षत्र के जातकों की ताकत और स्वाभाविक रुचियों के साथ पूरी तरह मेल खाते हैं।

रोहिणी के साथ कौन से नक्षत्र सबसे अनुकूल हैं?

वैदिक ज्योतिष में मृगशिरा, पूर्वाफाल्गुनी और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों को रोहिणी के साथ सबसे अनुकूल माना जाता है।

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