पुखराज — Jupiter का रत्न
पुखराज बृहस्पति देव का रत्न है जो देवों के गुरु हैं। विष्णु पुराण में बृहस्पति को पुखराज धारण किए हुए बताया गया है। बृहस्पति ज्ञान, धर्म, संतान, धन और आध्यात्मिक विकास का कारक है।
मुख्य तथ्य
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| ग्रह | Jupiter |
| उंगली | तर्जनी |
| धातु | सोना |
| धारण दिवस | गुरुवार |
| न्यूनतम वजन | 3–5 रत्ती |
पुखराज के लाभ
ज्ञान, समृद्धि, आध्यात्मिक विकास और सौभाग्य प्रदान करता है।
धनु और मीन लग्न वालों के लिए पुखराज सर्वश्रेष्ठ है। विवाह, शिक्षा और धन लाभ के लिए यह सबसे सुरक्षित रत्न माना जाता है।
कौन धारण करे
धनु और मीन लग्न वालों के लिए पुखराज सर्वश्रेष्ठ है। विवाह, शिक्षा और धन लाभ के लिए यह सबसे सुरक्षित रत्न माना जाता है।
किसे नहीं पहनना चाहिए
मिथुन, कन्या और मकर लग्न वाले ज्योतिषी परामर्श के बाद ही पुखराज धारण करें।
कैसे धारण करें
- दिन और समय: गुरुवार को सूर्योदय के 1 घंटे के भीतर धारण करें।
- धातु: सोना में जड़वाएं।
- उंगली: दाहिने हाथ की तर्जनी।
- वजन: ज्योतिषीय प्रभाव के लिए न्यूनतम 3–5 रत्ती।
- सक्रियण: पहनने से पहले रात भर कच्चे दूध, शहद और गंगाजल में रखें। सुबह 108 बार मंत्र जपकर धारण करें।
मंत्र: Om Gram Greem Graum Sah Gurave Namah
गुणवत्ता मार्गदर्शिका
सीलोन (श्रीलंका) का प्राकृतिक, अनुपचारित कैनरी पीला या सुनहला पुखराज सर्वोत्तम है।
पुखराज के विकल्प
सुनेला (सिट्रीन) या पीला पुखराज (टोपाज) पुखराज के सबसे प्रचलित किफायती विकल्प हैं।
महत्वपूर्ण सूचना
- कोई भी रत्न धारण करने से पहले किसी योग्य वैदिक ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
- रत्न प्राकृतिक, अनुपचारित और अच्छी गुणवत्ता का होना चाहिए।
- कृत्रिम या लैब-निर्मित रत्न में ग्रहीय ऊर्जा नहीं होती।
- पहनने से पहले रत्न को विधिवत सक्रिय (अभिमंत्रित) करें।
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